Sunday, May 31, 2015

वाकिफ़ है 👆वो मेरी कमज़ोरी से...!
वो रो देती है, और मैं हार जाता हूँ...

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Saturday, May 30, 2015

मोहब्बत करने चला है, तो कुछ अदब भी सीख लेना ऐ दोस्त...
इसमें हंसते साथ हैं, पर रोना अकेले ही पड़ता है....!!

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Friday, May 29, 2015

फकीर भी अजीब होते हे खुद के बच्चो को अकेला छोड़कर..
दूसरे के बच्चो को लंबी उमर की दुआएँ देते हे.

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Thursday, May 28, 2015

यह मंदिर-मस्ज़िद भी क्या गजब की जगह है दोस्तो.
जंहा गरीब बाहर और अमीर अंदर 'भीख' मांगता है..

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Wednesday, May 27, 2015

" आओ कुछ देर मेरी चाहत की छाँव मे आराम कर लो " थक गई होंगी ना मुझ से नफरत करते करते " ! !

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Tuesday, May 26, 2015

थोड़ी थोड़ी सी ही सही, मगर बातें तो किया करो,
चुपचाप से रहते हो, तो बेवफ़ा से लगते हो.

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Monday, May 25, 2015

क्यूँ दुनिया वाले मोहब्बत को खुदा का दर्ज़ा देते हैं,
हमने आज तक नहीं सुना कि खुदा ने बेवफाई की हो...!!!

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Sunday, May 24, 2015

 !!क्या ऐसा नहीं हो सकता हम प्यार मांगे... और तुम गले लगा के कहो, 'और कुछ?

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Saturday, May 23, 2015

दिल भी आज मुझे ये कह कर डरा रहा है |
करो याद उसे वरना मै धड़कना छोड़ दूंगा ||

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Friday, May 22, 2015

कुर्बान हो जाऊँ उस सख्श की हाथों की लकीरों पर.जिसने तुझे माँगा भी नहीं और तुझे पा भी लिया....

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Thursday, May 21, 2015

इत्र से कपड़ों को महकाना बड़ी बात नहीं
मज़ा तो जब है तेरे किरदार से खुशबु आये

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Wednesday, May 20, 2015

रोज ढलता हुआ सूरज कहता है मुझसे,
आज उसको बेवफा हुए एक दिन और बीत गया ।

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Tuesday, May 19, 2015

शायरी का बादशाह हु और कलम मेरी रानी,
अल्फाज़ मेरे गुलाम है,
बाकी रब की महेरबानी.

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Monday, May 18, 2015

खून अभी वो ही है,,
ना ही शोक बदले ना ही जूनुन, सुन लो फिर से,
रियासते गयी है,
रुतबा नही,
रौब ओर खोफ आज भी वही है।

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Wednesday, May 13, 2015

थोडी थोडी ही सही मगर बातेतो किया करो ....!!
चुप चाप से रहते हो तो बेवफा से लगते हो....!!

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Tuesday, May 12, 2015

रुलाने में अकसर "उनका" ही हाथ होता हैै जो कहते है की तुम हसते हुये अचछे लगते हो....

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Sunday, May 10, 2015


जिंदगी मे २ मिनट कोई मेरे पास ना बैठा,
आज सब मेरे पास बैठे जारहे थे….
कोई तौफाह ना मिला आज तक,
और आज फुल हि फुल दिये जा रहे थे…
तरस गये थे हम किसी एक हाथ के लिये,
और आज कंधे पे कंधे दिये जा रहे थे….
दो कदम साथ ना चलने को तैयार था कोई,
और आज काफिला बन साथ चले जारहे थे…
आज पता चला मुझे कि “मौत” कितनी हसिन होती है…कम्बख्त…
हम तो युहि जिंदगी जिये जा रहे थे.



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